Sunday, January 16, 2011

सरकार का न्यू इयर गिफ्ट पसन्द नहीं आया जनता को

महंगाई के बोझ तले दबी जनता के लिए एक और बुरी खबर. तेल कम्पनीयो ने बड़ते घाटे  की दुहाई देते हुए पेट्रोल की कीमत को 2 .50 से लेकर  2 .54 रूपये प्रति लीटर की बढोतरी का ऐलान किया नयी कीमते १६ जन से लगो हो गयी है एक महीने के भीतर दूसरी बार ऐसा हुआ है की पेट्रोल की कीमत के इजाफा हुआ तेल कंपनियों का कहना की अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत के दाम 92 डोलर प्रति बैरल पहुचने से हमे घ्रेलो बाज़ार में पेट्रोल की कीमत बढानी पड़ी इस हिसाब से तेल कम्पनी को लगभग 3 रूपये प्रति लीटर का घटा उठाना पड़ रहा था इस वजह से तेल कंपनियों  को कीमत बढानी पड़ी है
 सवाल यह उठता है की कीमते बड़ाई क्यों गयी?की तीनो कंपनियों ने एक साथ क्यों कीमते बडाई क्योकि ज्यादातर देखा गया है की तीनो कंपनियों के रेट बदने में एक दो दिन का अन्तेर होता है.
ध्यान देने वाली बात यह है की पिछले दिनों पेट्रोलियम मंत्री ने कहा था की जब तक महंगाई नियंत्रद में नहीं आ जाती तब तक पेट्रोल के दाम नहीं बढाये जायेंगे तो क्या पेट्रोलियम मंत्री के अनुसार अब महंगाई निय्त्रद में आ गयी है?
बी. ज. प. ने कहा की एक महीने के अंदर  दूसरी बार कीमत बड़ा कर मनोहन सरकार ने आम जनता को लूटना  शुरू कर दिया है   बी. जे. पि. प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने कहा की पेट्रोल के दम बड़ा नव वर्ष में मेह्न्ग्यी से तड़पती जनता को कड़वा तोहफा दिया है ऐसे में जब महंगाई बढ रही हो सरकार को कुछ रहत देनी चाहिए इसके उलट सरकार ने तेल की कीमतों में इजाफा कर दिया भारत में सरकार पेट्रोल २० रूपये में खरीद ६० रूपये में बेच रही है सरकारी कंपनिया ज़बरदस्त मुनाफा कमा  कर देश की जनता के  साथ अन्याय कर रही है
भारी   दबाव के चलते अब सरकार ने 19 जन. को कड़े कदम उठाने की घोसना हो सकती है सरकार इसके लिए राज्य सरकारों की रजामंदी चाहती है अगेर ऐसा हुआ तो महंगाई से जल्द निजात मिलना तय है.
महगाई को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने जिन उपायों का AGENDA बनाया है, उसके अनुसार राज्य सरकारे हर पखवाड़े केंद्र को आवश्यक कृषि वस्तुओ की स्टॉक की डिमांड और सप्ल्यी पर केंद्र को रिपोर्ट देगी| राज्य सरकारे रिटेल कंपनियों की कृषि वस्तुओ की स्टॉक लिमिट की नियमित जाच करेगी तय मात्र से ज्यादा लिमिट करने की स्थति में कंपनियों के खिलाफ कर्र्व्वायी होगी| जमाखोरों के खिलाफ कड़े कानून , बड़ा मुआवजा और कड़ी सजा देने का प्रावधान है अगेर राज्य सरकारे  राजी हुई हो तो कुछ समय की लिए चीनी समेत जिन कृषि उत्पादों पर वडा कारोबार चालू है ,उस पर ब्रेक लगाया जा सकता है और एक उपये यह है की सभी तरह के शुल्क ख़त्म करने होंगे| वित्त मंत्रालय के अधिकारियो का कहना है की मह्न्ग्यी के उपायों पर सहमती  जत्यी तो जल्द से जल्द इस दम घोटते महंगाई से ज़ल्द ही निजात मिल जायगी|

मगेर बेचरी जनता तो शिर्फ़ इतना चाहती है की जल्द से जल्द इस दम निकलती महगाई  से छुटकारा तो मिल जाए

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