Wednesday, January 19, 2011

हिला उत्तर भारत........


  
नई दिल्ली. पाकिस्तान के उत्तर पश्चिम इलाके में कल देर रात आए भीषण भूकंप ने भारत समेत एशिया के कई देशों को हिलाकर रख दिया है। भूकंप आज भी ऐसा प्रलय माना जाता है जिसे रोकने या काफी समय पहले सूचना देने की कोई प्रणाली वैज्ञानिकों के पास नहीं है। प्रकृति के इस तांडव के आगे सभी बेबश हो जाते हैं। सामने होता है तो बस तबाही का ऐसा मंजर जिससे उबरना आसान नहीं होता है।
क्वेटा का इतिहास भी वर्ष 1935 में एक ऐसा भूकंप देख चुका है जिसने क्वेटा को लगभग पूरी तरह से तबाह कर दिया था। वर्ष 1935 में आए भूकंप में 30 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। लेकिन भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील पाकिस्तान और भारत के उत्तरी हिस्सों में इस चुनौती से निपटने की तैयारियों को लेकर हमेशा चिंता व्यक्त की जाती रही है।कई विश्लेषकों और संगठनों का मानना है कि सरकारों का रुख आपदाओं से निपटने के प्रति बेहद गंभीरता लिए हुए नहीं रहा है।
आइए डालते हैं  एक नजर...भीषण भूकंप पर!

12
जनवरी 2010: कैरेबियाई देश हैती में आए शक्तिशाली भूकंप में एक लाख से अधिक लोगों की मौत। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 7.3 आंकी गई थी।
अक्टूबर 2009: इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप में आए भूकंप में 500 से अधिक लोग मारे गए।

02
फरवरी 2008 : चीन के सिचुआन प्रांत में आए भूकंप से हुई भारी तबाही में करीब 15 हजार लोग मारे गए और हजारों जख्मी हुए।

27
मई, 2006 : इंडोनेशिया के जकार्ता में आए भूकंप में छह हजार लोग मारे गए और 15 लाख बेघर हो गए।

08
अक्तूबर, 2005 : पाकिस्तान में 7.6 तीव्रता वाला भीषण भूकंप आया जिसमें करीब 75 हजार लोग मारे गए। करीब 35 लाख लोग बेघर हुए। इस भूकंप के झटके भारत में भी महसूस किए गए।

26
जनवरी 2001: भारत के गुजरात में रिक्टर पैमाने पर 7.9 तीव्रता का एक शक्तिशाली भूकंप आया। इसमें कम से कम 30 हजार लोग मारे गए और करीब 10 लाख लोग बेघर हो गए। भुज और अहमदाबाद पर भूकंप का सबसे अधिक असर पड़ा।

29
मार्च 1999: भारत के उत्तरकाशी और चमोली में दो भूकंप आए और इनमें 100 से अधिक लोग मारे गए।

30 सितंबर 1993: भारत के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों में आए भूकंपों में क़रीब दस हजार लोगों की मृत्यु हो गई।

Monday, January 17, 2011

फले से ही बनी ६ लेन की सड़क को दोबारा से ६ लेन बनाया जा रहा है लगत इसमें १०९ करोड़ के आएगी पर समय कितना लगेगा पता नहीं क्योकि एक साल पहले शुरू हुआ काम अभी भी जारी है हलाकि यह मामला है मैहरोली से गुडगाव का है मगर यह पुरे देश के हायवे के निर्माण का नज़ारा बयां करता है
   मजे के बात तो यह है की जब रास्ट्री राज मार्ग ने इस रोड का टेंडर निकला था तब डेल्ही मेट्रो इस पर ६ लेन का कम पूरा कर रही थी जब इसकी लगत लगभग ८ करोड़ आई थी तब इस रोड को बनाने में साये लगा था सिर्फ ८ महीने DMRC ने अभी अपना कम ख़त्म भी नहीं किया था की 19 फरवरी को इस इस रोड को नेशनल हिव्य का नाम दे दिया गया लेकिन ६ लेन, इसके साथ सड़क के किनारे फुटपाथ और साइकिल ट्रैक बनाने  के के लिये  टेंडर जन. में ही बुला ले लिए गए थे मगर इस सड़क के किनारे पेइवाहन मंत्री कमलनाथ जैसे मुल्क के  असरदार लोगो के फर्म्हौसे है तो इस वजह से इस कार्य में देरी हो रही है
लेकिन सवाल यह उठते है के.......?

कार्do  का खर्चा लेकिन न ओडिट न ही रेगुलेट

पूर्व केंद्रइए परिवहन  मंत्री सचिवे और N H A I के पूर्व चिएर्में योगेंदर नारायण के मुताबिक हिव्य सेक्टर को C A G और सूचना के मुताबिक होना चैये इस चेत्र में विशेषज्ञों की तीन सदस्यी स्वंतंत्र रेग्युल्त्री ओउथोरिटी के ज़रोरत है

केन्द्र्ये सड़क परिवहन मनरी और राजमार्ग मंत्री कमलनाथ ने बताया की हिव्य का कम अभी तक ठाप पड़ा था अभी तक हिएय को लेकर न तो कोई योजना थी, न दाद्लिने , न टार्गेट और न ही कम के अवार्ड ही है इस साल भी लक्ष्य १० हजार किलोमीटर कम देने का है आपको जल्द ही नतीजे दिखने लगेगे
इन्गीन्यर और ठेकेदारों की मिलीभगत
न्मंराल्ये व N A इके इंजीनयर की कन्सलटेंट और ठेदारो के साथ गहरी साथ्गत है इस्ससे हिघ्वय के काम में देरी व भ्रष्टाचार  फैल रहा है:- ब्रह्मा  दत्त पूर्व  केंद्रीय परिवहन सचिव का सड़क परिवहन पर बनी संसदिये समिति के बयां 

20 की जगह 5 किलोमीटर प्रतिदिन के हिसाब से हो रहा है
हिघ्वय ओउथोरिटी और इंडिया ने पाच वर्सो में ३५ किलोमीटर राजमार्ग नैरमं का लक्ष्य रखा थाई हर दिन २० किलोमीटर लेकिन फिलहाल ५ किलोमीटर प्रतीदिन का निरमं हो रहा है
मिठाक
१. कोई इन्फ्रास्त्त्कचार चेत्र में पैसे नहीं लगाना चाहता है क्योकि यह लाभ का सौदा नहीं है
२. सड़क बनाने जैसे विकाशील चीजो में [ऐसा डूबता जा रहा है
हकीकत
१. जूच कम्पनी साथ - आत साल में अरब पति हो गए कोयोकी रेट और फेत्र्ण ९० %है
२. हिघ्वय पर टोक और सेस के जरिये १० हजार करोर्ड से ज्यादा की कमई |

Sunday, January 16, 2011

सरकारी स्कूल क्यों नहीं

दिल्ली में नर्सरी दाखिले की प्रक्रिया चल रही है और ज्यादातर अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला किसी निजी स्कूल में कराना चाहते हैं। वे दिल्ली नगर निगम या सरकारी स्कूलों की ओर देखना तक नहीं चाहते। ऐसा नहीं है कि अभिभावकों की इस बेरुखी की वजह से दिल्ली सरकार या एमसीडी वाकिफ नहीं हैं। दोनों सरकारी एजेंसियां जानती हैं कि शिक्षा की गुणवत्ता और स्कूलों में संसाधनों की कमी ही वे कारण हैं, जिनकी वजह से ज्यादातर अभिभावक सरकारी स्कूलों से विमुख हैं। लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि ये दोनों एजेंसियां इस बात को लेकर जरा सा भी चिंतित नहीं हैं और स्कूलों में संसाधनों की कमी दूर करने व शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए कोई उल्लेखनीय प्रयास होते नहीं दिखाई दे रहे हैं। इसी सरकारी लापरवाही का नतीजा सोमवार को पश्चिमी दिल्ली के एक एमसीडी स्कूल में दिखाई दिया। वहां बिजली-पानी, डेस्क, इत्यादि न होने के कारण तमाम समस्याओं के बीच पढ़ने को मजबूर छात्र-छात्राओं ने मोमबत्ती व पोस्टर हाथों में लेकर स्कूल प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन कर रोष जाहिर किया। इन छात्रों ने न सिर्फ अपनी परेशानी बयां की, बल्कि निगम स्कूलों की तस्वीर भी सबके सामने उजागर कर दी।
जहां सरकार ने शिक्षा के अधिकार को लेकर कानून बना दिया हो, वहां सरकारी स्कूल के छात्रों का पढ़ाई छोड़कर समस्याएं दूर करने की गुहार लगाना निश्चित ही दुर्भाग्यपूर्ण है। और यह स्थिति यदि राजधानी के ही सरकारी स्कूलों की हो, तो फिर कहने को कुछ भी शेष नहीं रह जाता। इस बात का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है कि जब राजधानी के सरकारी स्कूलों का यह हाल है तो देश के दूरदराज के इलाकों की स्थिति क्या होगी? शिक्षा के अधिकार का सही अर्थो में लाभ तभी हो सकता है, जब स्कूलों में संसाधनों की कमी न हो और छात्रों को गुणवत्ता वाली शिक्षा प्राप्त हो। इसके लिए सरकारी स्कूलों को अपने तौर-तरीके में बदलाव करना होगा। निजी स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए भी दिल्ली सरकार और एमसीडी को अपने स्कूलों की स्थिति में सुधार करना चाहिए। अभिभावकों को जब तक निजी स्कूलों के स्तर का सरकारी विकल्प नहीं मुहैया कराया जाएगा, तब तक न तो निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लग पाएगी और न ही सही अर्थो में शिक्षा के अधिकार का लाभ मिल पाएगा।

सरकार का न्यू इयर गिफ्ट पसन्द नहीं आया जनता को

महंगाई के बोझ तले दबी जनता के लिए एक और बुरी खबर. तेल कम्पनीयो ने बड़ते घाटे  की दुहाई देते हुए पेट्रोल की कीमत को 2 .50 से लेकर  2 .54 रूपये प्रति लीटर की बढोतरी का ऐलान किया नयी कीमते १६ जन से लगो हो गयी है एक महीने के भीतर दूसरी बार ऐसा हुआ है की पेट्रोल की कीमत के इजाफा हुआ तेल कंपनियों का कहना की अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत के दाम 92 डोलर प्रति बैरल पहुचने से हमे घ्रेलो बाज़ार में पेट्रोल की कीमत बढानी पड़ी इस हिसाब से तेल कम्पनी को लगभग 3 रूपये प्रति लीटर का घटा उठाना पड़ रहा था इस वजह से तेल कंपनियों  को कीमत बढानी पड़ी है
 सवाल यह उठता है की कीमते बड़ाई क्यों गयी?की तीनो कंपनियों ने एक साथ क्यों कीमते बडाई क्योकि ज्यादातर देखा गया है की तीनो कंपनियों के रेट बदने में एक दो दिन का अन्तेर होता है.
ध्यान देने वाली बात यह है की पिछले दिनों पेट्रोलियम मंत्री ने कहा था की जब तक महंगाई नियंत्रद में नहीं आ जाती तब तक पेट्रोल के दाम नहीं बढाये जायेंगे तो क्या पेट्रोलियम मंत्री के अनुसार अब महंगाई निय्त्रद में आ गयी है?
बी. ज. प. ने कहा की एक महीने के अंदर  दूसरी बार कीमत बड़ा कर मनोहन सरकार ने आम जनता को लूटना  शुरू कर दिया है   बी. जे. पि. प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने कहा की पेट्रोल के दम बड़ा नव वर्ष में मेह्न्ग्यी से तड़पती जनता को कड़वा तोहफा दिया है ऐसे में जब महंगाई बढ रही हो सरकार को कुछ रहत देनी चाहिए इसके उलट सरकार ने तेल की कीमतों में इजाफा कर दिया भारत में सरकार पेट्रोल २० रूपये में खरीद ६० रूपये में बेच रही है सरकारी कंपनिया ज़बरदस्त मुनाफा कमा  कर देश की जनता के  साथ अन्याय कर रही है
भारी   दबाव के चलते अब सरकार ने 19 जन. को कड़े कदम उठाने की घोसना हो सकती है सरकार इसके लिए राज्य सरकारों की रजामंदी चाहती है अगेर ऐसा हुआ तो महंगाई से जल्द निजात मिलना तय है.
महगाई को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने जिन उपायों का AGENDA बनाया है, उसके अनुसार राज्य सरकारे हर पखवाड़े केंद्र को आवश्यक कृषि वस्तुओ की स्टॉक की डिमांड और सप्ल्यी पर केंद्र को रिपोर्ट देगी| राज्य सरकारे रिटेल कंपनियों की कृषि वस्तुओ की स्टॉक लिमिट की नियमित जाच करेगी तय मात्र से ज्यादा लिमिट करने की स्थति में कंपनियों के खिलाफ कर्र्व्वायी होगी| जमाखोरों के खिलाफ कड़े कानून , बड़ा मुआवजा और कड़ी सजा देने का प्रावधान है अगेर राज्य सरकारे  राजी हुई हो तो कुछ समय की लिए चीनी समेत जिन कृषि उत्पादों पर वडा कारोबार चालू है ,उस पर ब्रेक लगाया जा सकता है और एक उपये यह है की सभी तरह के शुल्क ख़त्म करने होंगे| वित्त मंत्रालय के अधिकारियो का कहना है की मह्न्ग्यी के उपायों पर सहमती  जत्यी तो जल्द से जल्द इस दम घोटते महंगाई से ज़ल्द ही निजात मिल जायगी|

मगेर बेचरी जनता तो शिर्फ़ इतना चाहती है की जल्द से जल्द इस दम निकलती महगाई  से छुटकारा तो मिल जाए

Thursday, January 13, 2011

विदेशी बैंक में जमा कला धन किसका? बीजेपी ने कहा हमारे पास है सबूत

मुंबई. विदेशी बैंकों पर जमा काले धन के मसले पर कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग करते हुए भाजपा के वरिष् नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने कहा है कि काला धन के तौर पर स्विस बैंक में जमा 20 लाख करोड़ रुपये भारत लाने के लिए कानून बनाना चाहिए। महंगाई और भ्रष्टाचार के खिलाफ यहां एक रैली को संबोधित करते हुए आडवाणी ने कहा कि ग्लोबल फाइनेंसियल ट्रांसपैरेंसी की रिपोर्ट चौंकाने वाली है जिसमें कहा गया है कि भारत के 20.85 लाख करोड़ रुपये स्विस बैंक में जमा हैं। उन्होंने कहा, ' हमने इस इस बारे में प्रधानमंत्री को चिट्ठी भी लिखी थी लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया है।'

आडवाणी ने कहा, ‘हमें ऐसा कानून भी बनाना चाहिए जिससे यह रकम स्वदेश लाई जा सके। हम आखिर इस मसले पर इसलिए चुप हैं कि कांग्रेस से जुड़े कुछ लोगों का इससे संबंध है। प्रधानमंत्री ने लोकसभा चुनाव के पहले जनता को भरोसा दिलाया था कि वह इस मसले पर गौर करेंगे लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। प्रधानमंत्री को इसका जवाब देना चाहिए।  
रैली में भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने दावा किया कि उन्हें स्विस बैंक के कुछ खातों की जानकारी है जिनका संबंध बोफोर्स केस से है। उन्होंने कहा, ' मुझे स्विस बैंक के ऐसे तीन अकाउंट नंबर की जानकारी है जिनका संबंध बोफोर्स मामले से है। क्वात्रोच्चि द्वारा विन चड्ढा के अकाउंट में डाले गए धन की जानकारी सभी को है और उसके गांधी परिवार से नजदीकी संबंध थे। कांग्रेस को इसका जवाब देना चाहिए।
आडवाणी ने अपने ब्लॉग के जरिये सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि शीर्ष अदालत विदेशी बैंकों में जमा भारतीय धन को वापस लाने के प्रयास कर लोगों का दिल जीत सकती है। आडवाणी ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ही विदेशी बैंकों में जमा लाखों करोड़ रुपए को वापस लाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट से गुहार आडवाणी ने कहा कि देश को सुप्रीम कोर्ट से बहुत उम्मीदें हैं। देश को उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले को तार्किक अंत तक पहुंचाएगा। आडवाणी ने कहा कि 462 मिलियन अमेरिकी डॉलर एक बहुत बड़ी रकम होती है जो यदि विकास कार्यों में लगा दी जाए तो भारत की तस्वीर बदल जाएगी। आडवाणी ने यह बात हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सरकार को विदेशी बैंकों में धन रखने वाले लोगों का नाम सार्वजनिक करने की चेतावनी का हवाला देते हुए कही।
अपने ब्लॉग पर विदेशी बैंकों में जमा कालेधन के बारे में लिखते हुए आडवाणी ने कहा कि इस मामले को निपाटकर सुप्रीम कोर्ट भारत के लोगों का दिल जीत सकता है। यदि सुप्रीम कोर्ट यह मामला तार्किक अंत तक पहुंचा देता है तो उसे भारत के लोग स्थायी धन्यवाद देंगे और हमेशा उसके कृतज्ञ रहेंगे।
आडवाणी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की आलोचना करते हुए लिखा कि मनमोहन सरकार अपने साढ़े छह साल के कार्यकाल में सबसे बुरे समय से गुजर रही है। आडवाणी ने लिखा कि कॉमनवेल्थ घोटाले, 2जी स्पैक्ट्रम घोटाले, मुंबई आदर्श सोसायटी घोटाले और कई अन्य घोटालों के खुलने के बाद अब देश की जनता सोचने लगी है कि सरकार में कई लोग है जो सिर्फ बेतहाशा दौलत कमा रहे हैं बल्कि देश को भी लूट रहे हैं।