Friday, October 12, 2012


मंहगाई  हाय ये महगाई

 पिछले दिनो डीजल के दाम में बढोत्तरी व साल में सिर्फ 6 घरेलू गऐस सिलेडर पर सब्सिडी मिलेगे। इन चीजो पर भी पड़ रहा है . इससे कारोबारी , दुकान दार, सब्जी बेचने वाले और छात्र, सभी की ज़दगी प्रभावित हो रही है
       देश व राजधानी दिल्ली में बीते कुछ महिनो से मंहगाई को मानो पर लग गअ हो मंगाई आसमान छूती जा  रही जिसने सभी वर्ग के लोगो को प्रभावित किया है जिस आलूकी कीमत लगभग दुगनी हो कर 20 हो गई हैं मुनिरका में रहने वाले छात्र रवेन्द्र ने बताया की लगातार मंहगाई बढ़ने से घर से ज्यादा पैसे मांगवाने पढ़ते है मगर पापा की तनख्वाह तो अभी उतनी ही हैं उनकी आय तो भढ़ नही मगर महगाई जरूर बढ़ी अक और छात्र ने कहा की कहम अपनी रोजमर्रा की जीचो में कमी भी कर रहे हैं , क्योकी घर को पैसा तय सीमे में ही आता हैं
नरेन्द्र का कहना है की घर से फोन आता हैं की बेटा कम से कम एक दूध पी लिया कर मगर महगाई देखे तो चाय से पहले सेजना पड़ता हैं
  
सरकार लगातार तर्क दे रही हैं की आमदनी में बढ़ी हैं पिछले दिसम्बर के बाद अभी तक तनख्वाह में बढ़ोत्तरी नही हुई हैं मुनिरका में दुकानदार ने बताया मंहगाई के कारण लोग अपनी जरुरत ता चीजो में कटौती कर रहे हैं पहले स्टूडेंस आते आते खे अच्छी –अच्छी और मंहगी शर्ट , टी शर्ट खरीदते थे अब ग्राहक भी कम हो गए है स और जो आते हैं को भी सस्ते कपड़े मांगते हैं
दुकान में एक ग्रारक ने बताया की  हम खरीदे तो जब , पैसे अन्य जरूरी वस्तुऔ को खरीदने में थर्च हो जातो हो जाते है तो महगे कपड़े कैसे खरीदे और मुख्यमंत्री जी का कहना  कि दुल्ली में रईश लोंग रहते हैं।
चाय बेचमे वाले पामाथार ने भताया की  हम घरेलू गैस का इस्तमाल बचा बचा कर करते हैं ताकी हम गैस का इस्तमालअपनी दुकान के लिए करतै हैं क्योकी गैस किलेडर के दाम बढ़ने से हमारी लागत ज्यादा आ रही हैं और अगर हम चाय के गाम बढ़ देते हैं दो ग्रारक कम हो जोते हैं तो मुझे समझ नही आ रहा की खया करू वच्चो को पढ़ना भी हैं सब कुछ करना अब नुश्किल नड़र आने लगा हैं
       उत्तर भारत की महिला जो शाम के वक्तसब्जिया बेचती है वो कहती है की सब्जिया बेचती है बो कहती है की सब्जियो के दाम बढ़ सए ग्राहक ग्राहक ज्यादा दामे में लेता नही और लागत कि कीमत के बराबर बेचते हैं अब घर में 9 सदस्य है तो उनका पालन पोषण किए करह सो होगा  समझ मही आता कभी दाल रोटी खाते थे मभ जटनी चावल के गुजारा चलाना पढ़ रहा हैं सरकार कई बार आर्थिक नीती का हवाला देती नज़र आती हैं मगर इन लोगो की आर्थिक हालत पर कौन ध्यान देंगा
       वुजशाद गार्डन निवासी अनिल नारायण ने कहा की सरकार कन तक यू ही आर्थिक विकास का हवाला देकर हमारी थाली में से खाना कम करती रहेगी सरकार सांसद की सब्सिडी कम करने की बात क्यों नही करती हैं । सरकार लगातार मंहगाई दर को कम करने की कोशिस कर रही हैं और लोन की ब्याज दरो में कटौती कर रही हैं
       किशोर पेशे से छोले भटूरे बेजते हैं उन्होने कहा की अब प्याज, मसाले और अन्य चीजो के दाम बढ़े हैं और मुनाफा बहुत घटा हैं और घर में पांच वच्चे हैं और पांचो पढ़ रहे हैं, बढ़ा बेटा सी.ए. बनना चाहता हैं अब कहां हैं इतना रुपया ।
मनमोहन ने कहा था इकॉनमिक ग्रोथ को रफ्तार देने और भारत में विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए कैबिनेट ने कई फैसले लिए हैं ष इससे मुश्किल हालात में भी हमारी तरक्की की प्रक्रिया मजबूस होगी और रोजगार बढ़ेगा ।
 दिल्ली की सीमा पुरी में रहने वाले एक आदमी जो कूड़ा उटाता उसने कहा की हमें तो समझ नही आता की शाम को अपने परिवार का पेठ पालने के रूपया कहा से आएगा ,सुबह उठते तो इ अस से, की आज अपने परिवार का हेट फर जास और में सरकार से नही , रोटी से मतलब हैं