Thursday, December 6, 2012

सरकारी अस्पतालो में लापरवाही कोई आम बात नहीं हैं।

दिल्ली के सरकारी अस्पतालो में लापरवाही एक आम बात नज़र आती हैं जिसको हाल ही में पांच लोगो ने अपनी जान गवाकर साबित कर दिया सरकारी अस्पतालो में लापरवाही उन सभी लोगों ने दोखी जो  लोग सरकारी अस्पतालो में जा चुके हैं दिल्ली सरकार ने पिछलो दिनो बहुत से कार्यक्रम आयोजिक कराए। कहीं तुगलक कहीं म्युचिक फेस्टिवल वगैराह वगैराह।

                  इनके उद्घाटन के लिए दिल्ली के बढ़े बढ़े नेता पहुचे मगर कभी-भी शीला सरकार का कोई नुमाइंदा इन सरकारी अस्पतालो में हो रही लारपवाही की जांच करने पहुचा ? कभी सरकार ने देखने की कोशिश की जो लोग आक्सीजन प्लांट में ठेकेदारी प्रथा के अन्दर कार्य कर रहें हैं वे इस योग्य हैं कि वह इसका संचालन टीक ढ़ग से कर पा रहे हैं या नही ।

                  उत्तर -पुर्वी दिल्ली में गुरू तेग बहादुर अस्पताल(जीटीबी) में देखने पर भी ऐसे मामले हैं जैसे इंमरजेंसी लेबर रुम के  बाहर बैठने की जगाह नही हैं। जिससे लोगो को खासी परेशानी का सामना करना पढ़ता हैं टीक इसी रूम के सामने सिक्योरिटी ड्युदी रूम हैं जिसमें उतनी कुर्सिया हैं जिन पर बैठने वाने की कमी हैं, तो प्रशासन को इन कुर्सियो को मरीज के अटैन्डेंट के लिए बाहर नही रख  देना चाहिए? ताकि वह अटैन्डेट बैट सके ।
  पूरे अस्पताल की बिल्डिंग के अंदर पीने का पानी तो ढूढ़ना जैसे खेत में सुई ढूढ़ने से भी ज्यादा मुश्किल हैं क्या कभी सीमापुरी विधानसभा के विधायक जो जीटीबी अस्पताल की सलाहकार कमेटी में हैं उन्होने इस समस्या को कम  करने कोशिश की हैं ?  वोटर को लुभाने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रमो के साथ- साथ मुल-भूत जरुरतो भी हैं जैसे अस्पतामो में अच्छी सुविधाए  भी बहुत जरुरी हैं ।

Friday, October 12, 2012


मंहगाई  हाय ये महगाई

 पिछले दिनो डीजल के दाम में बढोत्तरी व साल में सिर्फ 6 घरेलू गऐस सिलेडर पर सब्सिडी मिलेगे। इन चीजो पर भी पड़ रहा है . इससे कारोबारी , दुकान दार, सब्जी बेचने वाले और छात्र, सभी की ज़दगी प्रभावित हो रही है
       देश व राजधानी दिल्ली में बीते कुछ महिनो से मंहगाई को मानो पर लग गअ हो मंगाई आसमान छूती जा  रही जिसने सभी वर्ग के लोगो को प्रभावित किया है जिस आलूकी कीमत लगभग दुगनी हो कर 20 हो गई हैं मुनिरका में रहने वाले छात्र रवेन्द्र ने बताया की लगातार मंहगाई बढ़ने से घर से ज्यादा पैसे मांगवाने पढ़ते है मगर पापा की तनख्वाह तो अभी उतनी ही हैं उनकी आय तो भढ़ नही मगर महगाई जरूर बढ़ी अक और छात्र ने कहा की कहम अपनी रोजमर्रा की जीचो में कमी भी कर रहे हैं , क्योकी घर को पैसा तय सीमे में ही आता हैं
नरेन्द्र का कहना है की घर से फोन आता हैं की बेटा कम से कम एक दूध पी लिया कर मगर महगाई देखे तो चाय से पहले सेजना पड़ता हैं
  
सरकार लगातार तर्क दे रही हैं की आमदनी में बढ़ी हैं पिछले दिसम्बर के बाद अभी तक तनख्वाह में बढ़ोत्तरी नही हुई हैं मुनिरका में दुकानदार ने बताया मंहगाई के कारण लोग अपनी जरुरत ता चीजो में कटौती कर रहे हैं पहले स्टूडेंस आते आते खे अच्छी –अच्छी और मंहगी शर्ट , टी शर्ट खरीदते थे अब ग्राहक भी कम हो गए है स और जो आते हैं को भी सस्ते कपड़े मांगते हैं
दुकान में एक ग्रारक ने बताया की  हम खरीदे तो जब , पैसे अन्य जरूरी वस्तुऔ को खरीदने में थर्च हो जातो हो जाते है तो महगे कपड़े कैसे खरीदे और मुख्यमंत्री जी का कहना  कि दुल्ली में रईश लोंग रहते हैं।
चाय बेचमे वाले पामाथार ने भताया की  हम घरेलू गैस का इस्तमाल बचा बचा कर करते हैं ताकी हम गैस का इस्तमालअपनी दुकान के लिए करतै हैं क्योकी गैस किलेडर के दाम बढ़ने से हमारी लागत ज्यादा आ रही हैं और अगर हम चाय के गाम बढ़ देते हैं दो ग्रारक कम हो जोते हैं तो मुझे समझ नही आ रहा की खया करू वच्चो को पढ़ना भी हैं सब कुछ करना अब नुश्किल नड़र आने लगा हैं
       उत्तर भारत की महिला जो शाम के वक्तसब्जिया बेचती है वो कहती है की सब्जिया बेचती है बो कहती है की सब्जियो के दाम बढ़ सए ग्राहक ग्राहक ज्यादा दामे में लेता नही और लागत कि कीमत के बराबर बेचते हैं अब घर में 9 सदस्य है तो उनका पालन पोषण किए करह सो होगा  समझ मही आता कभी दाल रोटी खाते थे मभ जटनी चावल के गुजारा चलाना पढ़ रहा हैं सरकार कई बार आर्थिक नीती का हवाला देती नज़र आती हैं मगर इन लोगो की आर्थिक हालत पर कौन ध्यान देंगा
       वुजशाद गार्डन निवासी अनिल नारायण ने कहा की सरकार कन तक यू ही आर्थिक विकास का हवाला देकर हमारी थाली में से खाना कम करती रहेगी सरकार सांसद की सब्सिडी कम करने की बात क्यों नही करती हैं । सरकार लगातार मंहगाई दर को कम करने की कोशिस कर रही हैं और लोन की ब्याज दरो में कटौती कर रही हैं
       किशोर पेशे से छोले भटूरे बेजते हैं उन्होने कहा की अब प्याज, मसाले और अन्य चीजो के दाम बढ़े हैं और मुनाफा बहुत घटा हैं और घर में पांच वच्चे हैं और पांचो पढ़ रहे हैं, बढ़ा बेटा सी.ए. बनना चाहता हैं अब कहां हैं इतना रुपया ।
मनमोहन ने कहा था इकॉनमिक ग्रोथ को रफ्तार देने और भारत में विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए कैबिनेट ने कई फैसले लिए हैं ष इससे मुश्किल हालात में भी हमारी तरक्की की प्रक्रिया मजबूस होगी और रोजगार बढ़ेगा ।
 दिल्ली की सीमा पुरी में रहने वाले एक आदमी जो कूड़ा उटाता उसने कहा की हमें तो समझ नही आता की शाम को अपने परिवार का पेठ पालने के रूपया कहा से आएगा ,सुबह उठते तो इ अस से, की आज अपने परिवार का हेट फर जास और में सरकार से नही , रोटी से मतलब हैं