दिल्ली के सरकारी अस्पतालो में लापरवाही एक आम बात नज़र आती हैं जिसको हाल ही में पांच लोगो ने अपनी जान गवाकर साबित कर दिया सरकारी अस्पतालो में लापरवाही उन सभी लोगों ने दोखी जो लोग सरकारी अस्पतालो में जा चुके हैं दिल्ली सरकार ने पिछलो दिनो बहुत से कार्यक्रम आयोजिक कराए। कहीं तुगलक कहीं म्युचिक फेस्टिवल वगैराह वगैराह।
इनके उद्घाटन के लिए दिल्ली के बढ़े बढ़े नेता पहुचे मगर कभी-भी शीला सरकार का कोई नुमाइंदा इन सरकारी अस्पतालो में हो रही लारपवाही की जांच करने पहुचा ? कभी सरकार ने देखने की कोशिश की जो लोग आक्सीजन प्लांट में ठेकेदारी प्रथा के अन्दर कार्य कर रहें हैं वे इस योग्य हैं कि वह इसका संचालन टीक ढ़ग से कर पा रहे हैं या नही ।
उत्तर -पुर्वी दिल्ली में गुरू तेग बहादुर अस्पताल(जीटीबी) में देखने पर भी ऐसे मामले हैं जैसे इंमरजेंसी लेबर रुम के बाहर बैठने की जगाह नही हैं। जिससे लोगो को खासी परेशानी का सामना करना पढ़ता हैं टीक इसी रूम के सामने सिक्योरिटी ड्युदी रूम हैं जिसमें उतनी कुर्सिया हैं जिन पर बैठने वाने की कमी हैं, तो प्रशासन को इन कुर्सियो को मरीज के अटैन्डेंट के लिए बाहर नही रख देना चाहिए? ताकि वह अटैन्डेट बैट सके ।
पूरे अस्पताल की बिल्डिंग के अंदर पीने का पानी तो ढूढ़ना जैसे खेत में सुई ढूढ़ने से भी ज्यादा मुश्किल हैं क्या कभी सीमापुरी विधानसभा के विधायक जो जीटीबी अस्पताल की सलाहकार कमेटी में हैं उन्होने इस समस्या को कम करने कोशिश की हैं ? वोटर को लुभाने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रमो के साथ- साथ मुल-भूत जरुरतो भी हैं जैसे अस्पतामो में अच्छी सुविधाए भी बहुत जरुरी हैं ।
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