पाकिस्तान में थार मौस्थल के बाच में स्थित जैन मंदिर आज खुराफाती तत्वों की तोड़फोड़, बहुमूल्य कलाक्र्तियो की चोरी और ख़राब तरीके से किया जा रहा रहा रख रखाव ...!
पाकिस्तान के शिन्द प्रान्त का दक्षिण जिला है-थारपरकर, जैसा नाम से ही ज़ाहिर है यह भारत के विशालतम रेगिस्तान को भी छूता है और श्हिंध के पूरब से लेकर अरब सागर के दक्षिणी हिस्से तक फैला है, भारत के राजिस्थान से लेकर सतलज नदी तक (पाकिस्तानी हिस्सा )यह जिला अपनी बांहें पसरता है.
बारिश के बाद यह इलाका लाल्हती हरियाली से सरबोर हो जाता है और शहरके बाशिंदे को MAJBOOR KARTA है की VE ISKI NAISRGIK SUNDERTA और MANORAMA SHANTI का PURJOR LUFT UTHEYIN AKHIRKAR SHOR के SAMENDER के DOBTEIN-UTARTE SHAIER को को BHALA CHHIYEN भी KYA ?
RAIT के TEELEIN अपनी TAMAM SHILVATEIN से KISI GJGAMIMI NAYIKA की YAAD DILLATEIN है और SATH ही यह भी BATATEIN है की यह रेगिस्तान कभीं समंदर का हिस्सा हुआ करता था.!
हालाँकि इसका एक और पहलू भी है शहेरवालो की असेवेंदनशीलता से थारपारकर की सम्रद्ध संaस्कृतिक विरासत को भी खतरा है , कयोंकि वे यहाँ की कअलात्मक विरासत को चुरने से भी नहीं हिचकते है थारपरकर जिले के नागर्परकर गौण से २८ किलोमीटर दूरी पर ही गूरी मंदिर है. यहाँ पाकिस्तान के पुरातत्व अवेम संघराल्ये विभाग के महानिदेशक का हस्ताक्षरित सुचानापठ भी लगका है. उस पर लिखा है "एंटिक एक्ट १९७५ (१९७६ की धरा ) की धारा१९ के तहत कोई भी व्यक्ति इन इमारतो नष्ट करता या नुकसान पौचाता है विकृत फौचाता है छ्हती पहुचता है कुछ लिखता है या अंकित करता है तो वेह कारावास का हकदार होगा सजा तीन साल तक ही हो सकती है जुरमाना भी हो सकता है या फिर दोनों ही हो सकतें है"
दुखद बात तो यह है की इस चेतावनी को हकीकत में बदलने के लिए शायद ही कोई शुराखाकर्मी वहा नज़र आता है. इसी वजह से कोई अस्चर्या नहीं होता जब पाकिस्तान का यह सबसे पुराना जैन मंदिर है लापरवाह अतिक्रमानियो से नुकसान झेल रहा है.
मंदिर की हालत अभी से ही खस्ता दिखाती है और सम्बंधित लोगो और विभागों की लापरवाही इसी से साफ़ दिखाती है की पहले जहा सक्दो श्रदालु इस मंदिर के दर्शन करने आया करतें थे, अब वहा चाग्गादादों ने अपबे बसेरा बना रखा है पाकिस्तान सर्कार के पुरातावे इस बात को इस तरह से रखतें है हरत में लग्बह्ग ६० लोग जैन रह्तिएँ है हम गोरी मंदिर को इन लोगो के लिए एक जियाराटका मुआकम बनाना चाहतें है. हमने इसी मामले मे संघीय सरकार को एक मास्टर प्लान में भी सोंपा है. दुर्भाग्य से हमारे हमारें शिल्पियों को जैन मंदिरों की मरमत में महारत हेल नहीं है. हम उनको इस काम के जरूरी ट्रेनिग के लिए बहरत भेजना चाहेतें है बस हमारी तक़रीबन ५ करोड़ की योजना को सरकारी स्वकृति का इंतजार है.
पूर्वे निदेशक काशिम के मुताबिक शिन्द में १२८ पुरातत्व मह्त्वे के इस्थान और एस्मार्क है, लेकिन उनकी देखभाल करने वाले चोकीदार केवल पचालस है इसकी वजह से इस काम के लिए स्वीक्रति फंड की कमी है इन हालत में किसी को अचरच नहीं होता है अगर गोरी मंदिर की और थारपरकर की और भी विरासतें आज खस्ता हाल है
गूरी मंदिर का निरमान परिनगर के एल जैन मांगो ने किया था. इसकी ईमारत चोकोर आकार की है जिसकी लम्बाई ७४ फीट है और छोदैय ४९ फीट है कुछ इस्म्बह सफेद संगमरमर के है और कुछ बलौअ फथर के बने हुए है
कासिम का कहना है ली की यह मंदिर परिनगर शहर का हिस्सा था और अगर पुरे इलाके की खुदाई इ जायें तो उस शहर के बारें में काफी जानकारी मिल जाएगी इसके अलावा बहुमूल्य आक्रतिया तो मेलेंगी ही.
आज भी यहाँ की लगभग ४० % आबादी हिन्दुओ की है जिसमे से अधिकांस अनुसूचित जाती के भील और कूल है , लेकिन यहाँ कभी भी साम्प्रदायिक दंगें नहीं हुए.
मानाजाता है की २००६ की कुद्दै में करीब २१ भूम्ली मुर्तिया यहाँ पाई गयी थी कासिम का मानना है की पैनगर के खान्देरो ने केवल इतिहास की जानकारी में सहायक होंगे, बल्कि धार्मिक पर्यटन केंद्र के टूर पर भी विकसित हो सकेंगे यहाँ से बरामद लोहे के टुकड़े इस बात के गवाह है की पुरने परिनगर में जहाजो का निर्माण हुआ करता था धार्मिक पर्यटन के अलावा वे लोग भी यहाँ आने में खुवैश्मंद होनेगे जो इतिहास में रूचि रखतें होंगे....!


No comments:
Post a Comment