Friday, December 31, 2010

क्या गलती है रेल यात्रियों की?

प्राकर्तिक आपदा,    आतंकवाद,   नक्सलवाद या फिर कोई आन्दोलन इनमे से कोई भी वजह हो मगर इन सभी के कारन शिर्फ़ एक ही चीज सबसे अदिक प्रबावित होती है तो वह सिर्फ रेलगाड़ी है
रेल मंत्रालय का हल यह है की वो रेलों की दुर्गति और यात्रियों को पेरशान देख रहा है.
देश में लगभग १० हजार 500 यात्री रोजाना रेल चलती है  है इनमे रोजाना करीब ८ लाख से ज्यादा लोग सफ़र करतें है सुरक्षा के लिहाज़ से देखे तो सबसे कमजोर मानी जाने वाली भारतीय रेल भारत  में सबसे   कमजोर मानी जाने वाली ट्रेन को ही हर कोई निशाना बनता है जैसे की इस वक़्त गुर्जर आन्दोलन को सफल बने में सभी आन्दोलन करियो ने इस वक़्त पत्त्रियो को हतियार की तरह इस्तमाल कर रहे है जिसे राजेस्थान होकर जाने वाली ट्रेने या तो रद्द की जा चुकी है या फिर ghanto let chal rahi है लेकिन  सर्कार  की तरफ  से ऐसी  कोई पहल  देखने  को नहीं  मिली  है की सर्कार  भी  इन  पटरियों  को खली  करना  छाती  है हिरनी  की बात  तो यह है अभी  तक  रेल मंत्री  ने अभी  तक  रेल ट्रैक  को खली  करने  के  लिए  किसी  भी  तरह की पहल  नहीं  की. प्रकर्ति भी रेल गाड़ी को निशाना बना रही है पूरा उतेर भारत कोहरे की चपेट में है जिसकी मार रेल गाडियों पर भी पड़ी है जिस वजह से ज्यादातर रेल गाड़िया लेते चल रही है बड़ी शंख्या में लोग स्तेसिओं  में फसे पड़े है  और रेल मंत्रालय यह बताने की स्तथी  नहीं है की कोहरे का असर कितनी गाडियों पर पड़ेगा!
मगर वजह कुछ भी हो उसका नुकसान  सिर्फ  यात्रियों पर ही पड़ता है!  न  जाने कब  कोई पहल  होगी   और न जाने जनता को  कब  तक  परेशां होना पड़ेगा...

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